सुबह वाकई बेनकाब थी

सुबह के 5.30 बजे, जब अँधेरा भूरा होने लगता है और सपाट आसमान में हलके नीले बादल दरारें बनाकर उभरने लगते हैं तब अंसारी जी के मोहल्ले में सब कुछ रोज़ाना वाली एक -सी धुन में शुरू हो जाती है.

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